जब बलदेव के बल पर झूम उठा मारवाड़...
मानव सभ्यता में दो पहलू होते है।एक अच्छाई का तो दूसरा बुराई का।हर सभ्यता के हर कालखंड में जब अत्याचार सीमा लांघने लगते है तो कोई न कोई महापुरुष बगावत का झंडा उठाकर खड़ा हो जाता है।मारवाड़ की मरुधरा में जब राजाओं/सामंतों का आतंक चरम पर था उस समय कुचेरा,नागौर की धरा पर 17जनवरी 1889 को मगाराम जी राड़ के घर किसान केसरी के नाम से विख्यात बलदेवराम जी मिर्धा का जन्म हुआ था।मगाराम जी का परिवार जोधपुर राज्य में पोस्ट व टेलीग्राफ का कार्य देखता था व इनके उत्कृष्ट सेवाओं के लिए जोधपुर राज्य की तरफ से "मिर्धा"की उपाधि दी गई थी।
मानव सभ्यता में दो पहलू होते है।एक अच्छाई का तो दूसरा बुराई का।हर सभ्यता के हर कालखंड में जब अत्याचार सीमा लांघने लगते है तो कोई न कोई महापुरुष बगावत का झंडा उठाकर खड़ा हो जाता है।मारवाड़ की मरुधरा में जब राजाओं/सामंतों का आतंक चरम पर था उस समय कुचेरा,नागौर की धरा पर 17जनवरी 1889 को मगाराम जी राड़ के घर किसान केसरी के नाम से विख्यात बलदेवराम जी मिर्धा का जन्म हुआ था।मगाराम जी का परिवार जोधपुर राज्य में पोस्ट व टेलीग्राफ का कार्य देखता था व इनके उत्कृष्ट सेवाओं के लिए जोधपुर राज्य की तरफ से "मिर्धा"की उपाधि दी गई थी।
