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Tuesday, July 10, 2018

पाखण्डवाद के विरोध में हमारी कमेरी जाट कौम......

पाखण्डवाद के विरोध में हमारी कमेरी जाट कौम ने सदियों से संघर्ष करने के बाद भी आखिरकार आज अपने हथियार डाल दिये हैं । इसी का परिणाम है कि आज इस बहादुर किसान कौम के नौजवान शेर पागलों की तरह कंधों पर कांवड़ उठाये घूम रहे हैं और रास्तों में गाड़ियों के नीचे कुत्ते, बिल्लियों की तरह कुचले जा रहे हैं वरना कभी इन्हीं के पूर्वजों ने आक्रमणकारियों और पाखण्डियों को कुचला था । जौत की जमीन रही नहीं और रोजगार मिला नहीं तो शादी हुई नहीं तो फिर इन्हें पाखण्डियों ने बहकाया गया कि कावड़ लाओ दुल्हन आएगी । शायद इन्हें पता नहीं दुल्हनों की हत्या तो पेट में ही हो गई थी । कुछ गांजा, चरस और भांग का लुत्फ उठाने जाते हैं तो कुछ शिविरों में हलवा, पूरी खाने जाते हैं । एक अनुमान के अनुसार हर साल औसतन आठ लाख जाट यह पागलपन कर रहे हैं जिसमें औसतन एक कावड़िया लगभग 10 हजार तक खर्च करके प्रति वर्ष जाट कौम का 80 करोड़ रुपया सरेआम बर्बाद किया जा रहा है । यह कार्य लगभग 20 सालों से चल रहा है और बढ़ता ही जा रहा है ।

Thursday, May 17, 2018

किसानों का मक्का तेजाजी धाम खरनाल


किसानों का मक्का तेजाजी धाम खरनाल
जाट कौम के महापुरुषों को जानने की कड़ी में आज हम सत्यवादी वीर तेजाजी के बारे में जानने का प्रयास करेंगे।वीर तेजाजी का जन्म एक जाट घराने में हुआ जो धोलिया वंशी थे। नागौर जिले में खड़नाल गाँव में ताहरजी और रामकुंवरी के घर माघ शुक्ला, चौदस संवत 1130 यानि 29 जनवरी 1074 में हुआ था। उनके पिता गाँव के मुखिया थे।ताहरजी नागवंशी धौलिया गोत्र के जाट है।संत कान्हाराम जी,मनसुख जी रिणवा,ठाकुर देशराज आदि इतिहासकारों ने वंशावली का वर्णन करने की काफी हद तक कोशिश की है लेकिन तथ्यों के अभाव में ज्यादा पुख्ता जानकारी नहीं मिल पाई है।यह सत्य प्रतीत होता है कि मध्यभारत के नागवंशी कबीले का पलायन आगरा से धौलपुर व फिर नागौर के जायल कस्बे की तरफ हुआ और जायल में काला गोत्री जाटों से झगड़े के कारण खरनाल में ठिकाना बनाया।उस समय इस इलाके में चौहान वंश का केंद्रीय शासन माना जाता था।ताहड़ देव जी 24गांवों के परगने खरनाल के प्रमुख बन गए थे।

Wednesday, May 16, 2018

बाबा टिकैत MHENDRA SINGH TIKAIT

आज किसान मसीहा बाबा टिकैत को दिल से बहुत याद कर रहा हूँ।मेरा मन तो नहीं था ऐसे फकीरी में जीने वाले इंसान के बारे में लिखने को क्योंकि जिसको दिल से चाहता हूँ,जिसको आदर्श मानता हूँ,जिसका जीवन मेरा प्रेरणाश्रोत हो उसके बारे में लिखने की सोचता हूँ तो हाथ कांपने लग जाते है,बुद्धि जवाब दे देती है,भावुकता लबों पर उतर जाती है,आंसू पलकों पर छा जाते है!

डाबड़ा कांड के शहीद

#अमर_शहीदों_को_नमन्                                           13मार्च 1947का दिन था।जगह थी नागौर जिले की डीडवाना तहसील में गांव डाबड़ा!एक कि...