कथा लगभग छह सात सौ साल पहले की यानि कि सल्तनत काल की है और यूं है कि नागौर में दो चौधरी हुआ करते थे। नाम था गोपाल जी और धर्मो जी। गोपाल जी जायल गांव के बासट गोत के जाट और धर्मो जी खिंयाला के बिडियासर । दोनों चौधरी उस समय के पटवारी के पद पर थे। दिल्ली के सुल्तानों के लिए लगान संग्रहण करने का कार्य किया करते थे