Thursday, August 30, 2018

कुछ सवाल खुद से पूछिए....

*यदि आप समाज के वरिष्ठ सदस्य हैं तो अपने आप से ये प्रश्न कीजिये....*

1. क्या मैंनेअपने स्तर पर किसी सामाजिक कुरीति को रोकने का प्रयास किया???
2. क्या मैंने समाज के किसी गरीब व असहाय व्यक्ति या उसके परिवार की सहायता की या सहायता का भरोसा दिलाया???
3. क्या मैंने किसी निजी विवाह समारोह में उपस्थित होने पर दहेज न लेने व दहेज न देने के लिए किसी एक व्यक्ति को प्रेरित किया???

Saturday, August 25, 2018

आजादी का अंत बुरा....

*आज़ादी_का_भी_अंत_बुरा  #मर्यादा_बनाये_रखिये*

*आज़ादी के नाम पर नग्नता,फूहड़ता,परिवार विघटन,घर से भागना,अभी एक लड़की नग्न साइकल सवार बनी थी यह आज़ादी है तो हम पारम्परिक ही अच्छे है,सनी लियोनी आइडल है आज़ादी की,जो नशे में एक्ट्रेस अपने परिवार कल्चर को जूते की नोक पर रखती हैं ये आदर्श है आज ,शर्म नही रही आज़ादी की व्याख्या ही गलत हो गई है ।*

*यह घटना 2009 जनवरी की है मुझे एक ड्यूटी के सिलसिले में पुणे जाना हुआ किसी भाई के कागज सत्यापन के लिए,मैं शिवाजीनगर पहुँचा जहां से मुझे खाड़की ईस्ट पुलिस स्टेशन भेज दिया गया ।*

हम क्यों करते हैं मृत्युभोज...?

*हम क्यों करते हैं मृत्यु भोज❓❓*

*✍*रामलाल जाणी भीमथल*
*8003041770*

*इस गंभीर लेख को पूरा पढ़ें..*


*✍✍अक्सर लोगों को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि मृत्यु भोज मृत आत्मा की तृप्ति के लिए, उन्हें स्वर्ग का टिकट दिलाने, मृत आत्मा की शांति के लिए किया जाता है,जो मृत्यु भोज में पुण्य मिलता वह मृत आत्मा को आगे प्राप्त होता है, उसमें उसकी आत्मा की मुक्ति होती है उस को शांति मिलती है या उस व्यक्ति ने आपके लिए इतने वर्ष काम किया था तो आप उसके मौत पर कम से कम इतना खर्चा तो कर सकते हैं ।।*

Monday, July 30, 2018

जाटवाद बनाम ब्राह्मणवाद.....

 
जाटवाद बनाम ब्राह्मणवाद
आज से 2500 ई.पू. जाटों ने सिंधु घाटी की सभ्यता का निर्माण चार्वाक दर्शन (भौतिकवादी दर्शन) के आधार पर किया था । उस समय जाट जाति नाग जाति कहलाती थी । सम्राट तक्षक इस जाति के सबसे बड़े चौधरी थे और नांगलोई (दिल्ली), तक्षशिला (पाकिस्तान) तथा नागौर (राजस्थान) नाग जाति के केन्द्रीय स्थान थे । नागों ने ही नागरी लिपि को विकसित किया था जो आगे चलकर देवनागरी कहलाई । इस सिंधु घाटी की सभ्यता के खिलाफ ब्राह्मणों ने षड्यन्त्र रचे तथा सम्राट तक्षक की हत्या करके एवं चार्वाक दर्शन को धीरे-धीरे खत्म करके, इस महान् सभ्यता का पतन कर दिया ।
तक्षक और सिंधु गोत्र आज भी जाटों के ही गोत्र हैं । सिंधु घाटी की सभ्यता के पतन के बाद ब्राह्मणों ने वैदिक युग (1500 ई.पू. से 600 ई.पू.) की शुरुआत की । इस वैदिक युग में वेदों की रचना हुई, पाखंडों को बढ़ावा मिला तथा जन्म आधारित जाति व्यवस्था की शुरुआत हुई । नाग (जाट) इस वैदिक व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष करते रहे । आगे चलकर इस संघर्ष में से बुद्ध की ब्राह्मणविरोधी मूवमेंट खड़ी हुई । शाक्य वंशीय नागमुनि गौतम बुद्ध ने सर्वाधिक क्रान्तिकारी नागों को नये नाम ‘जाट’ के नाम से सम्बोधित किया । जाट शब्द का अर्थ है “ब्राह्मणवाद के खिलाफ जुटे हुए सैनिक ।”
इस काल में बुद्ध के हीनयान-महायान की भान्ति जाटों के गोत्र प्रचलित हुए । जाटयान, राजयान, कादयान, ओहल्याण, बालयान, दहियान (दहिया), गुलियान (गुलिया), नवयान (नयन), लोहयान (लोहान), दूहयान (दूहन), सिद्धू (सिद्धार्थ गौतम), महायान (मान) इत्यादि ।

दिल्ली जाटों की है.......

जी हाँ भारत की राजधानी और उसके आसपास का क्षेत्र जाटों है जरा गौर से पढ़िए... 
सबसे शक्तिशाली पहाड़ी की चोटी पर खड़े होने का 'फील गुड'. जी, रायसीना हिल्स जहां देश के कार्यपालक अध्यक्ष (राष्ट्रपति) निवास करते हैं.

क्या गजब की चीज बनाई लूट्यन्स साब ने. (यहां इनकी प्रतिमा अब तक सुरक्षित है, टूटी नहीं है. तस्वीर संलग्न). चार मंजिलें, 330 एकड़ का इलाका, 340 निहायत ही सुसज्जित कमरे, 74 बरामदे, 37 मीटिंग हॉल, करीब एक किलोमीटर का गलियारा, 18 सीढ़ी मार्ग, 37 फव्वारे आदि आदि.

Monday, July 23, 2018

उलझन ओर सवाल ? जट्ट नश्ल

उलझन ओर सवाल ?
जाट ईश्वर के रूप जो किसी एजेंट के द्वारा बनाया गया हो नही मानता ।जाट मूर्तिपूजक सिर्फ इसीलिए नही है क्योंकि जाट पृकृतिपूजक है ।आस्था के नाम पर गांव में दादा खेड़ा,भूमिया,जठेरा,पीर,चामड़, जहां दूध और अन्न का अंश इसीलिए चढ़ता रहा है कि पृकृतिं जो हमारी मेहनत के बाद हमे देती है। सब उसी आस्था से जुड़ा है। जाट जमीन और पानी से जुड़ी नस्ल है। इसके उत्सव भी नदियों किनारे होते रहे है ।

Friday, July 20, 2018

भगतसिंह की ज़िन्दगी के वे आख़िरी 12 घंटे

भगतसिंह की ज़िन्दगी के वे आख़िरी 12 घंटे - रेहान फ़ज़ल, बीबीसी संवाददाताभगत सिंह

लाहौर सेन्ट्रल जेल में 23 मार्च, 1931 की शुरुआत किसी और दिन की तरह ही हुई थी. फ़र्क सिर्फ़ इतना-सा था कि सुबह-सुबह ज़ोर की आँधी आयी थी.
लेकिन जेल के क़ैदियों को थोड़ा अजीब-सा लगा जब चार बजे ही वॉर्डेन चरतसिंह ने उनसे आकर कहा कि वो अपनी-अपनी कोठरियों में चले जायें. उन्होंने कारण नहीं बताया. उनके मुंह से सिर्फ़ ये निकला कि आदेश ऊपर से है.
अभी क़ैदी सोच ही रहे थे कि माजरा क्या है, जेल का नाई बरकत हर कमरे के सामने से फुसफुसाते हुए गुज़रा कि आज रात भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दी जानेवाली है
उस क्षण की निश्चिन्तता ने उनको झकझोर कर रख दिया

डाबड़ा कांड के शहीद

#अमर_शहीदों_को_नमन्                                           13मार्च 1947का दिन था।जगह थी नागौर जिले की डीडवाना तहसील में गांव डाबड़ा!एक कि...