Tuesday, July 10, 2018

मैं जट हूँ मै एक नस्ल हूँ ......

मैं जट हूँ मै एक नस्ल हूँ जो हर मजहब,धर्म,पन्थ में होकर भी जाट ही हूँ ।मुझे धर्मो,मजहबो,पन्थो की नजर के चश्मे से देखने ओर बाटने वालों ये नस्ल है टुकड़ो में नही बटेगी ।दूरिया गलतफहमियां अधिक दिन तक दूध,खून से सींचे सदियों पुरानी नस्ल के इस रिश्ते को दूर नही रख सकते है।

मैं उन महान पुरखो का अंश हूँ जो पृकृतिं के उपासक ओर संरक्षक रहे है। मैं उस परम्परा विरासत का हिस्सा हूँ जहाँ सुबह की दस्तक के आखिरी अंधेरे पर नींद त्यागने के बाद भूखे प्यासे उन पशुओं,परिवार की शारीरिक व आर्थिक ऊर्जा के संचय के लिये जुट जाता हूँ। इन सभी के पेट भरने के इंतजाम के बाद ही में पहला निवाला अपने हलक के नीचे उतारता हूँ ।बेजुबान पशुओं की हर सेवा करता हूँ जिनका में पालक हूँ ।

पाखण्डवाद के विरोध में हमारी कमेरी जाट कौम......

पाखण्डवाद के विरोध में हमारी कमेरी जाट कौम ने सदियों से संघर्ष करने के बाद भी आखिरकार आज अपने हथियार डाल दिये हैं । इसी का परिणाम है कि आज इस बहादुर किसान कौम के नौजवान शेर पागलों की तरह कंधों पर कांवड़ उठाये घूम रहे हैं और रास्तों में गाड़ियों के नीचे कुत्ते, बिल्लियों की तरह कुचले जा रहे हैं वरना कभी इन्हीं के पूर्वजों ने आक्रमणकारियों और पाखण्डियों को कुचला था । जौत की जमीन रही नहीं और रोजगार मिला नहीं तो शादी हुई नहीं तो फिर इन्हें पाखण्डियों ने बहकाया गया कि कावड़ लाओ दुल्हन आएगी । शायद इन्हें पता नहीं दुल्हनों की हत्या तो पेट में ही हो गई थी । कुछ गांजा, चरस और भांग का लुत्फ उठाने जाते हैं तो कुछ शिविरों में हलवा, पूरी खाने जाते हैं । एक अनुमान के अनुसार हर साल औसतन आठ लाख जाट यह पागलपन कर रहे हैं जिसमें औसतन एक कावड़िया लगभग 10 हजार तक खर्च करके प्रति वर्ष जाट कौम का 80 करोड़ रुपया सरेआम बर्बाद किया जा रहा है । यह कार्य लगभग 20 सालों से चल रहा है और बढ़ता ही जा रहा है ।

Monday, July 9, 2018

फौजी दिनेश बेनीवाल इतिहासकार की कलम ✍✍

जरूर पढ़ें

फौजी दिनेश बेनीवाल इतिहासकार की कलम ✍✍

कुछ जाट विरोधी मानसिकता लगी हुई है जो जट्ट नस्ल के बारे में बहुत गलत तरह से अपनी घटिया मानसिकता दर्शाते हैं। उनके लिए एक जबाब है ।

बात तार्किक करूँगा जो सामने है उसकी करूँगा अतीत के भ्रम ओर कल्पनाओ की बात नही करूँगा ।

जाट नस्ल क्या है ये सब जानते है दुनिया में कई देशों में जाट नाम की जगह आबाद है आज भी गूगल करो देखो ।

जट्ट नस्ल के राजे महाराजे तो अनगिनत है नाम लेते थक जाएंगे ।मैं अभी ताजे अतीत की ही बात करूंगा जो सत्य है जिसकी कोई काट नही है भरतपुर ओर लाहौर ये दोनों सल्तनत जट्टो की ताकत का एहसास कराती है ।महाराजा शेर ए पंजाब महाराजा रणजीत सिंह जब तक जिये ।पंजाब अफगान से लेकर दिल्ली तक मिला रहा ।भरतपुर को जाट प्लेटो एशियाई अफलातून महाराजा सूरजमल ने वो ताकत बनाया जिसको मुगल,राजपूत,मराठे,अंग्रेज कोई नही जीत सका ,अजय रियासत रही है भरतपुर ।

Thursday, July 5, 2018

जिस इंसान या कौम को अतीत जानने का अहसास नही होता" उस इंसान या कौम का दुनियां में कोई इतिहास नही होता"

जिस इंसान या कौम को अतीत जानने का अहसास नही होता"
उस इंसान या कौम का दुनियां में कोई इतिहास नही होता"
पोस्ट को सम्पुर्ण पढ़े
लेखक :- Ashok Singh Bhadu
🙏 *राम राम/सत श्री अकाल/वालैकुम सलाम/ जाट भाईयों*🙏
मैं *अशोक सिंह भादू-पुत्र-S/oजाट गोरधन सिंह भादू* जो यह पोस्ट लिखने जा रहा हुँ! इस पोस्ट को पुरा(सम्पुर्ण) ही पढ़े तो बेहतर होगा! वर्ना आधा अधूरा पढ़ने का कोई फायदा नही है! मैं पिछले 4-5साल से सोसियल मिडिया के सहारे जाट कौम के इतिहास को जानने में लगा हुआ हुँ!मैं मेरी इस कौम के अतीत के बारे में जितना जानता हुँ! वह बात हर रोज नयी ही होती है! और इस कौम का अतीत कभी खत्म नही होता! हर रोज एक नया पन्ना मिलता है इस कौम का *5* साल में मैनें जितना जाना जैसा जाना जो समझा वो यहा इस पोस्ट में लिख रहा हुँ! प्लीज सभी भाई-बहन इस पोस्ट को पढ़ने की कोशिश करें! जाट वीरों बात यह है की हम जितना हमारे अतीत को जानते है उतना उसके अंदर खोते जाते है! लेकिन फायदा क्या है?

Wednesday, July 4, 2018

बाबा खरथाराम चौधरी

वीर प्रसूता मारवाड़ की धरा।।
एक फ़रिश्ता धरती पर उतरा।।
गाँव भणियाणा में बाबा ने जन्म लिया।
जन सेवार्थ जीवन समर्पित किया।
सन् 1939 बलदेवराम से हुई मुलाकात ।
शिक्षा,समाज हित की हुई बात।।
बाबा ने किया सामन्तों का सामना।
मन में थी किसान हित की कामना ।।
चरम सीमा पर था सामंती अत्याचार।

Monday, June 11, 2018

इंडियन मिलिट्री एकेडमी देहरादून में आयोजित पासिंग आउट परेड में 4 वर्ष की ट्रेनिंग के बाद बाड़मेर किसान के बेटे ने बताया गौरव कम से कम मजदूरी में रेत के ट्रक भी खाली किए कड़ी मेहनत से आयुष जिले के पहले पैरा कमीशंड ऑफिसर कहते हैं कड़ी मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती है जिसे सार्थक कर दिखाया जिले करो कि ढाणी सिणधरी के रहने वाले आयुष आयुष ने अपना बचपन का पिता राम चारण किसान है जिनके पास इतने पैसे नहीं थे कि उसको पढ़ाई पढ़ाई पढ़ाई लेकिन आई उसकी पढ़ाई के प्रति ललक इतनी थी कि वह कम पेपर मजदूरी के लिए गया बजरी के ट्रक खाली थी और अपनी पढ़ाई को निरंतर जारी रखा गांव में स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद सीनियर सेकेंडरी स्तर की पढ़ाई बाड़मेर से कि इसके बाद जुलाई 2014 से आई एन ए में प्रशिक्षण डेट है इस ट्रेनिंग के दौरान आयोजित गतिविधियों और प्रदर्शन के आधार पर अलग-अलग रेजीमेंट के लिए चयन होता है कड़ी मेहनत उत्साह और कार्यकुशलता के कारण आयुष चौधरी को भारत के सबसे मजबूत कही जाने वाली रेजिमेंट टू बहराइच स्पेशल फोर्स के लिए चयनित किया गया शनिवार को इंडियन मिलिट्री एकेडमी देहरादून में आयोजित पासिंग आउट परेड में 4 वर्ष की ट्रेनिंग के बाद आयुष को लेफ्टिनेंट की रैंक प्रदान की गई देहरादून में आयोजित एक समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में नेपाल के सेनाध्यक्ष जनरल राजेंद्र जी मौजूद रहे पाइपिंग माता की जोत और पिता राजू राम सारण बाड़मेर की पारंपरिक वेशभूषा में थे उनके साथ एनसीसी अधिकारी कैप्टन आदेश कुमार कैलाश कुमार आदि मौजूद रहे कैप्टन आदर्श किशोर जाणी 49 के संयोजक सुरेश सारण बनवाई थी कैलाश कुमार और सतवीर आदि मौजूद थे लेफ्टिनेंट आयुष का बाड़मेर के युवाओं के लिए संदेश राष्ट्र सेवा और जज्बे के लिए सर्वोत्तम क्षेत्र सहना है या हार्ड वर्क बहादुरी सासरे उत्साह से उस मुकाम पाया जा सकता है बाड़मेर के युवाओं में बहुत काबिलियत है लेकिन अभी तक वजन छोटा रहकर सिर्फ सेना में जवानों की भर्ती होते हैं उचित तैयारी से उन्हें सैन्य अधिकारी के रूप में आगे आना चाहिए इसके लिए बहुत सी भाषाओं को तोड़ा है इंग्लिश और लाइक क्वालिटी के लिए बहुत अभ्यास किया मन में एक ही धुन थी कुछ करके दिखाना है आज मैं बहुत खुश हूं मेरे माता-पिता का बहुत बड़ा तैयार है यह पैरा स्पेशल फोर्स पैरा स्पेशल फोर्स भारतीय सेना के सर्वोच्च लड़ाकू और खतरनाक क्लास को अंजाम देने वाली मानी जाती है मुंबई आतंकी हमले सर्जिकल स्ट्राइक और उरी हमले में पैरा ने अद्भुत पराक्रम का परीक्षा दिया था
बाड़मेर। बाड़मेर की मरुस्थली धरती जवानों की बहादूरी और साहस के लिए हमेशा से ही प्रसिद्ध रही है। अब इस धरती से सेना में अधिकारी के रूप में भी दस्तख दे दी है। यह कारनामा कर दिखाया है बाड़मेर जिले के नेहरों की ढाणी सिणधरी के राजूराम सारण और हीरों देवी के बेटे लेफ्टिनेंट आयुष सारण ने।
आयुष जिले के वो प्रथम व्यक्ति है जो पैरा में कमीशंड ऑफिसर बने है। दरअसल इंडियन मिलिट्री एकेडमी देहरादून में आयोजित पासिंग आउट परेड में चार वर्ष की कड़ी ट्रेनिंग के बाद आयुष को लेफ्टिनेंट की रैंक प्रदान की गई। दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि नेपाल के सेनाध्यक्ष जनरल राजेन्द्र चेती थे। पाइपिंग सेरेमनी के दौरान आयुष सारण की माता हीरों देवी और पिताजी राजूराम सारण बाड़मेर की पारंपरिक वेशभूषा में थे।
पाकिस्तान से लगी सीमा के जिले और निरक्षर किसान के बेटे द्वारा ऑफिसर बनने की खुशी में आईएमए तमाम अधिकारी उत्साहित होकर बधाईयाँ दे रहे थे। इतना ही नहीं आयुष सारण बाड़मेर में पढ़ाई के दौरान स्वयं मजदूरी करके खर्च वहन करता था। कभी कभार ट्रक खाली करता तो कभी कमठे पर जाया करता था। गौरतलब है कि पैरा स्पेशल फोर्स भारतीय सेना की सर्वोच्च लड़ाकू और खतरनाक टास्क को अंजाम देने वाली मानी जाती है। मुम्बई आतंकी हमले, सर्जिकल स्ट्राइक और उड़ी हमले में पैरा ने अद्भुत पराक्रम का परिचय भी दिया था।

नीट में प्रिंस का परचम Barmer`s boy is Prince of NEET








नीट में प्रिंस का परचम 

बाड़मेर जिले का छोटा सा कस्बा है धोरीमन्ना !

 पिछले कुछ सालों से धोरीमना ने हर प्रतियोगिता परीक्षा में अपना परचम लहराया है, RAS, IAS से लेकर तमाम छोटी-बड़ी प्रतियोगिता परीक्षा में धोरीमना के बेटे बेटियों ने टॉप पर अपने झंडे गाड़े हैं।
धोरीमन्ना के लाल श्री दूदाराम हुड्डा ने पिछली RAS  परीक्षा में राजस्थान में 21 वीं रैंक हासिल की थी।

4 जून 2018 को  केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस यानी नीट 2018 का परिणाम घोषित किया गया  जिसमें बाड़मेर के प्रिंस चौधरी ने पांचवां स्थान प्राप्त किया है। प्रिंस ने 720 में से 686 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया 5वां स्थान और ओबीसी वर्ग में पूरे भारत में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

डाबड़ा कांड के शहीद

#अमर_शहीदों_को_नमन्                                           13मार्च 1947का दिन था।जगह थी नागौर जिले की डीडवाना तहसील में गांव डाबड़ा!एक कि...