Saturday, May 26, 2018

एक शख्सियत का छोटी सी जीवनी आपके सामने पेश कर रहा हूं
🖋🖋✒✒✒✒
एकमात्र बाड़मेर के किसान का बेटा ने
पत्रकारिता में अपने पूरे हिंदुस्तान में परचम लहराया


श्रीमान विरमाराम पिता श्री स्वर्गीय बन्नाराम जी

वीरमा राम के पूर्वज मूलतः बाड़मेर के माडपुरा-बरवाला पंचायत के रहने वाले हैं, जो पशुपालन का काम करते थे. ये लोग अक्सर गर्मियों के दिनों में अपने रेवड़ चराने के लिए वर्तमान जालौर जिले के मैदानी और पहाड़ी इलाकों का रुख करते थे, क्योंकि बाड़मेर की तुलना में जालौर जिले में पशुओं के लिए चारा थोड़ी आसानी से उपलब्ध था. देश की आज़ादी के वक़्त इनके पिताजी-दादाजी ने जालौर जिले के भीनमाल उपखंड में अपने रेवड़ के साथ डेरे डाल रखे थे. आजादी के बाद जब देश में भूमि-बन्दोबस्ती का कानून लागू हुआ तो पशुओं के डेरे वाली जमीनों पर इन्होंने अपने हक़ जता दिया और उक्त जमीनें इन पशुपालकों के नाम हो गई. कालांतर में इन्होंने में इन्होंने बाड़मेर से अपने कई रिश्तेदारों, भाई-बन्धुओं को भी बुला लिया. आज ये लोग 'ज्याणीयों की ढाणी' नाम के गांव में अच्छी खासी तादाद में आबाद हैं.

वीरमा राम के पिताजी एक निरक्षर किसान थे लेकिन उन्होंने अपने बच्चों की शिक्षा पर पूरा जोर दिया. इसी का नतीजा था कि वीरमा राम ने शुरआती पढ़ाई गांव में करने के बाद नवोदय स्कूल में दाखिला हासिल किया. राजस्थान विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया. ग्रेजुएशन के बाद वे भारत के नामी विश्विद्यालय जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय चले गए जहां से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में MA, MPhil और पीएचडी की. साथ ही पत्रकारिता भी. वीरमा राम ने करीब 5 सालों तक ज़ी न्यूज के साथ काम किया फिर वे जिंदल ग्रुप के 'न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया' नामक चैनल के साथ जुड़ गए. पत्रकारिता में सीनियर ओहदों पर रहने के अलावा भी वो कई सारे थिंक टैंक, सामाजिक संस्थाओं के साथ जुड़े रहे. वीरमा राम बाहर के कुछ देशों के साथ-साथ देश के लगभग हर कौने का दौरा कर चुके हैं. विदेश मामलों, देश के सियासी हालातों से लेकर सामाजिक मसलों पर वे लगातार रिपोर्टिंग करते रहे हैं और लिखते रहे हैं.

उनके पसंदीदा विषय किसानी, जापान और सिंध रहे हैं. भारत-जापान संबंधों पर पीएचडी करने के बाद वे कुछ पुस्तकों के लेखन पर काम कर रहे हैं.

वीरमा राम के निरक्षर पिताजी के शिक्षा के प्रति रुझान का ही नतीजा है कि उनकी छोटी बहन जहां चिकित्सा सेवा में कार्यरत है तो उनका छोटा भाई राजस्थान प्रशासनिक सेवा का अधिकारी है.

बकौल वीरमा राम, दुनिया में शिक्षा से बड़ा कोई हथियार नहीं है. और समाज में क्रांतिकारी बदलाव का सबसे बड़ा जरिया शिक्षा ही है.
यह बाड़मेर मारवाड़ के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है
वहां पहुंचने के बाद बाड़मेर के युवाओं से संपर्क और उनका मार्गदर्शन करते रहते हैं
 रूबरू होने का मौका मिला तो बहुत अच्छा  लगा
पत्रकार श्रीमान विरमाराम जी
आपको बधाई अग्रिम भविष्य की शुभकामनाए....

Friday, May 25, 2018

मालाणी के सिरमौर रामदान

रामदान डऊकिया है मालाणी के सिरमौर।
हमेशा याद रहेगा इतिहास का वह दौर।।
तेजाराम के घर एक वीर ने जन्म पाया।
वह  इतिहास में राम दान कहलाया।।
15 मार्च 1884 का दिन निराला था।
वह वीर भविष्य में क्रांति लाने वाला था।।
सभी ने मिलकर खुशियां मनाई।
सबसे खुश थी जन्मदात्री दौली माई।।
मालाणी का गांव का था सरली।
जिसने बदलाव की हुंकार भर ली।।

Thursday, May 24, 2018

करतार सिंह सराभा


जन्म 24 मई 1896-शहीदी 16 नवम्बर 1915 (फांसी)
दुनिया की किसी भी क्रूर सत्ता के खिलाफ अपनी मात्र भूमि के लिए यलगार करने वालो में सबसे कम उम्र में शहीद होने वाला सूरमा 19 वर्ष में फासी पर झूलने वाला

यूनाइटेड नेशन के रिकोर्ड में दर्ज करतार सिंह ग्रेवाल इनका जन्म 1896ई. में जिला लुधियाना पंजाब के सराभा गाँव के जाट सरदार मंगल सिंह के घर हुआ था ।ये अपने माता पिता की अकेली औलाद थे इनका बचपन बड़े लाड प्यार और सुख सुविधाओ के बीच बीता था ।ये अपनी किशोर अवस्था में ही अमेरिका पहुच गए थे ये वहा जाकर गदर पार्टी के मुख पत्र का संचालन कर रहे थे ।

Tuesday, May 22, 2018

महाराजा सूरजमल जाट

13 फरवरी 1707 बदन सिंह घर जन्म पाया।
सन 1733 सूरजमल ने गढ भरतपुर बसाया।।
वीरता धीरता चातुर्य से सबको लोहा मनवाया ।
अजेय योद्धा का परचम विश्व भर में लहराया।।
वो जाट वीर था सदा सर्वधर्म हितकारी ।
हिन्दू मुस्लिम सब प्रजा थी उनको प्यारी ।।
25 वर्ष की उम्र में सोघर जीत आया।

Saturday, May 19, 2018

बलदेवराम जी मिर्धा

जब बलदेव के बल पर झूम उठा मारवाड़...

मानव सभ्यता में दो पहलू होते है।एक अच्छाई का तो दूसरा बुराई का।हर सभ्यता के हर कालखंड में जब अत्याचार सीमा लांघने लगते है तो कोई न कोई महापुरुष बगावत का झंडा उठाकर खड़ा हो जाता है।मारवाड़ की मरुधरा में जब राजाओं/सामंतों का आतंक चरम पर था उस समय कुचेरा,नागौर की धरा पर 17जनवरी 1889 को मगाराम जी राड़ के घर किसान केसरी के नाम से विख्यात बलदेवराम जी मिर्धा का जन्म हुआ था।मगाराम जी का परिवार जोधपुर राज्य में पोस्ट व टेलीग्राफ का कार्य देखता था व इनके उत्कृष्ट सेवाओं के लिए जोधपुर राज्य की तरफ से "मिर्धा"की उपाधि दी गई थी।

Thursday, May 17, 2018

किसानों का मक्का तेजाजी धाम खरनाल


किसानों का मक्का तेजाजी धाम खरनाल
जाट कौम के महापुरुषों को जानने की कड़ी में आज हम सत्यवादी वीर तेजाजी के बारे में जानने का प्रयास करेंगे।वीर तेजाजी का जन्म एक जाट घराने में हुआ जो धोलिया वंशी थे। नागौर जिले में खड़नाल गाँव में ताहरजी और रामकुंवरी के घर माघ शुक्ला, चौदस संवत 1130 यानि 29 जनवरी 1074 में हुआ था। उनके पिता गाँव के मुखिया थे।ताहरजी नागवंशी धौलिया गोत्र के जाट है।संत कान्हाराम जी,मनसुख जी रिणवा,ठाकुर देशराज आदि इतिहासकारों ने वंशावली का वर्णन करने की काफी हद तक कोशिश की है लेकिन तथ्यों के अभाव में ज्यादा पुख्ता जानकारी नहीं मिल पाई है।यह सत्य प्रतीत होता है कि मध्यभारत के नागवंशी कबीले का पलायन आगरा से धौलपुर व फिर नागौर के जायल कस्बे की तरफ हुआ और जायल में काला गोत्री जाटों से झगड़े के कारण खरनाल में ठिकाना बनाया।उस समय इस इलाके में चौहान वंश का केंद्रीय शासन माना जाता था।ताहड़ देव जी 24गांवों के परगने खरनाल के प्रमुख बन गए थे।

डाबड़ा कांड के शहीद

#अमर_शहीदों_को_नमन्                                           13मार्च 1947का दिन था।जगह थी नागौर जिले की डीडवाना तहसील में गांव डाबड़ा!एक कि...